पटना में गंगा का पानी छूने लायक भी नहीं, हो सकती है ये गंभीर बीमारियां

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१३ जनवरी २०१८ १७:५९:१७ Jagran Hindi News - bihar:patna-city

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी की सफाई तो प्रतिदिन हो रही है, बावजूद इसके पानी इ‍तना अधिक दूषित हो गया है कि इसके छूने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती है। पर पूर्ण लेख पटना में गंगा का पानी छूने लायक भी नहीं, हो सकती है ये गंभीर बीमारियां

Vice सभी समाचार Time१३ जनवरी २०१८ १७:५९:१७


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दुनिया के खूबसूरत जलाशय जिनके पानी में है जहर, छूने भर से जा सकती है जान

1.8627288 ०८ अगस्त २०१७ १०:२७:४१ Jagran Hindi News - news:oddnews

दुनिया में कई खूबसूरत नदियां और झील हैं। जिनके पानी को छूने भर से ही आपकी जान जा सकती है।

Vice सभी समाचार Time०८ अगस्त २०१७ १०:२७:४१


नीतीश ने कहा- नहाने लायक भी नहीं बचा गंगा का पानी, ध्यान दे केंद्र सरकार

1.5212023 ०२ जून २०१७ ०२:२७:२४ bhaskar

पटना. नीतीश कुमार ने कहा कि गंगा की निर्मलता उसकी अविरलता के बिना संभव नहीं है। गंगा का पानी आज नहाने लायक भी नहीं बचा है। हम इस मामले को लगातार उठाते रहे हैं। गंगा की धारा में कमी से इसके तल में अत्यधिक सिल्ट जमा हो गया है लेकिन चितले कमेटी ने स्थल निरीक्षण किए बिना सिल्ट पर रिपोर्ट जारी कर दी। मुख्यमंत्री ने राजकीय अतिथिशाला में गुरुवार को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा जीर्णोद्धार मंत्री उमा भारती के साथ गंगा की अविरलता के मुद्दे पर बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि चितले कमेटी की रिपोर्ट पर बिहार ने प्रतिक्रिया केंद्र को दे दी है। फरक्का बराज बनने के बाद गंगा के जल का नैसर्गिक प्रवाह बाधित हुआ है। जो गाद पहले जल के साथ बह जाता था, अब नदी के तल में जमते जा रहा है। 20 साल पहले गंगा की गहराई और पानी को देखते थे। जब आज देखते हैं तो रोना आता है। गंगा छिछली हो गई है। गंगा की विशेषता को समझना होगा। इंग्लैंड और अमेरिका की नदियों से गंगा की तुलना नहीं हो सकती। अब सोन और पुनपुन की धार भी खत्म हो गई है। उमा ने भी गंगा में गाद की समस्या को गंभीर बताया और...

Vice null Time०२ जून २०१७ ०२:२७:२४


नहाने लायक भी नहीं बचा गंगा का पानी, ध्यान दे केंद्र : नीतीश

1.236932 ०२ जून २०१७ ००:३५:५७ bhaskar

मुख्यमंत्रीनीतीश कुमार ने कहा कि गंगा की निर्मलता उसकी अविरलता के बिना संभव नहीं है। गंगा का पानी आज नहाने लायक भी नहीं बचा है। हम इस मामले को लगातार उठाते रहे हैं। गंगा की धारा में कमी से इसके तल में अत्यधिक सिल्ट जमा हो गया है लेकिन चितले कमेटी ने स्थल निरीक्षण किए बिना सिल्ट पर रिपोर्ट जारी कर दी। मुख्यमंत्री ने राजकीय अतिथिशाला में गुरुवार को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास गंगा जीर्णोद्धार मंत्री उमा भारती के साथ गंगा की अविरलता के मुद्दे पर बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि चितले कमेटी की रिपोर्ट पर बिहार ने प्रतिक्रिया केंद्र को दे दी है। फरक्का बराज बनने के बाद गंगा के जल का नैसर्गिक प्रवाह बाधित हुआ है। जो गाद पहले जल के साथ बह जाता था, अब नदी के तल में जमते जा रहा है। शेष|पेज11 नहाने लायक भी... 20साल पहले गंगा की गहराई और पानी को देखते थे। जब आज देखते हैं तो रोना आता है। गंगा छिछली हो गई है। गंगा की विशेषता को समझना होगा। इंग्लैंड और अमेरिका की नदियों से गंगा की तुलना नहीं हो सकती। अब सोन और पुनपुन की धार भी खत्म हो गई है। उमा ने भी गंगा में गाद की...

Vice null Time०२ जून २०१७ ००:३५:५७


सच में मैली हो गई 'गंगा', नहाने लायक भी नहीं रहा पानी

1.1849698 १८ मई २०१७ ०८:१०:१२ Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala

'पापियों के पाप' धोने वाली गंगा नदी अब आपको बीमार कर सकती है। नदी का पानी इतना गंदा है कि पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं बचा है।

Vice null Time१८ मई २०१७ ०८:१०:१२


इस जहरीले पानी को छूने से भी डरते थे लोग, इन्होंने पीने लायक बनाया

1.1436896 २० फ़रवरी २०१७ ००:२३:४८ bhaskar

जालंधर. संत सीचेवाल और बिहार के सीएम नीतीश कुमार रविवार दोपहर गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी से डेढ़ किलोमीटर दूर निर्मल कुटिया बोट से पहुंचे। 10 साल पहले काली बेईं गंदगी से भरी पड़ी थी। फैक्ट्रियों और कस्बों के सीवरेज का पानी इसमें गिरता था। श्री गुरूनानक देव ने लगाई थी डुबकी.... - शहरों के विस्तार और औद्योगिक क्रांति के बाद बेईं ने अपना वजूद खो दिया था। - गंदे नाले में तब्दील हो चुकी बेईं के किनारे खड़ा होना भी मुश्किल हो गया था। - संत सीचेवाल ने सफाई का बीड़ा उठाया। 10 साल से ज्यादा वक्त इसे साफ करने में लग गया। - 160 किलोमीटर लंबी यह वही बेईं है, जिसमें डुबकी लगाने के बाद प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुबाणी को जन-जन तक पहुंचाया था। - इसका न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि इसके सूखने से किनारे में बसने वाले हजारों गांवों में भी ग्राउंड वाटर का लेवल गिर गया था। - संत सीचेवाल ने इसे दोबारा पुनर्जीवित किया है। अब नदी किनारे बसे गांवों के ग्राउंड वाटर में वृद्धि हुई है। कुछ भी करना नामुमकिन नहीं - संत ने जब सीएम नीतीश कुमार को बोट...

Vice null Time२० फ़रवरी २०१७ ००:२३:४८


नींद पूरी न होने से आपके बच्चे को हो सकती है ये गंभीर बीमारी

1.1436896 २८ दिसंबर २०१६ १६:१४:०९ Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala

प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की याददाश्त कम नींद के कारण प्रभावित हो रही है और वे भुलक्कड़ हो रहे हैं। टीवी और मोबाइल गेम में व्यस्त रहने की वजह से उनकी नींद पूरी नहीं हो रही है।

Vice null Time२८ दिसंबर २०१६ १६:१४:०९


रेलवे का पानी पीने योग्य नहीं, हो सकती है गंभीर बीमारियां!

1.1436896 १२ सितंबर २०१६ १२:२८:१५ Live Hindustan Rss feed

उत्तर भारत के प्लेटफॉर्म पर और स्टॉफ क्वार्टर में भारतीय रेलवे द्वारा सप्लाई पानी पीने के योग्य नहीं है। सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन और नेशनल एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।

Vice सभी समाचार Time१२ सितंबर २०१६ १२:२८:१५


खाने लायक नहीं, फिर भी बन रहे बर्फ के गोले, हो सकती हैं कई बीमारियां

0.98747474 २० अप्रैल २०१६ ०३:२६:०८ bhaskar

जबलपुर. आवश्यक सूचना- इस बर्फ का उपयोग खाने के लिए न करें। यह सूचना शहर में संचालित हो रहीं सभी आइस फैक्ट्रियों में बड़े-बड़े शब्दों में लिखी है। इस सूचना को कभी शोपीस की तरह दीवार पर लटका दिया जाता है तो कभी निकल कर फेंक दिया जाता है, ऐसा हो भी क्यों न, इसे पढ़ने के बाद कौन सा बर्फ की खपत में कमी आ जाती है। शहर में हर रोज आइस फैक्ट्रियाें से 12 सौ से अधिक सिल्लियों की सप्लाई होती है। एक सिल्ली का वजन 130 से 150 किलोग्राम होता है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतनी अधिक मात्रा में बर्फ का उपयोग किन-किन चीजों में और कहां-कहां किया जा रहा है। गंदे पानी से बनने वाले बर्फ का उपयोग न सिर्फ पेय पदार्थों में मिलाने के लिए किया जाता है, बल्कि हर गली-चौराहे पर दिखने में बच्चों को लुभाने वाले आकर्षक बर्फ के गोले भी इसी बर्फ से बन रहे हैं। लस्सी और जूस में गंदे बर्फ का उपयोग गर्मी के दिनों में लस्सी, कुल्फी और जूस की डिमांड सबसे अधिक होती है। इन सभी चीजों को ठंडा करने के लिये गंदे पानी या रॉ वॉटर से बने बर्फ का उपयोग किया जाता है। वहीं होटलों में भी...

Vice null Time२० अप्रैल २०१६ ०३:२६:०८


लापरवाही से दांतों में हो सकती है गंभीर बीमारी: डाॅ. पांचाल

0.98747474 १३ सितंबर २०१५ २२:५८:५० bhaskar

जींद | दंतस्वास्थ्य पखवाड़े में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा रविवार को लोगों को दंत रोगों के बारे मे जानकारी दी। इस दौरान सिविल अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल ने यहां में बन रहे 100 बेड वाले अस्पताल में काम कर रहे मजदूरों के दांतों की जांच कर उन्हें तंबाकू आदि खाने की सलाह दी। डॉ. पांचाल ने बीड़ी, सिगरेट अन्य नशीली वस्तुओं के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव और इनसे होने वाली कैंसर जैसी भयानक बीमारी के बारे में बताया। इसके बाद अर्जुन स्टेडियम में खिलाड़ियों का स्वास्थ्य जांचा। उन्होंने दांतों पर ब्रश करने के तरीके, दांतों को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान संबंधित, मुंह में दुर्गंध आने, दांतों पर ठंडा गर्म लगने, मुंह का कैंसर रोकने के बारे में जानकारी दी। इस दंत पखवाड़े का समापन 15 सितंबर को होगा। जींद. विद्यार्थियोंको दांतों के बारे में जानकारी देते डॉ. रमेश।

Vice null Time१३ सितंबर २०१५ २२:५८:५०


कभी पीते थे, अब छूने लायक नहीं है नए तालाब का पानी, परेशानी

0.9751875 ०४ सितंबर २०१५ ००:४०:०० bhaskar

नगर के आजाद चौक में स्थित नया तालाब के पानी का कभी नगरवासी भोजन बनाने में उपयोग करते थे। यहां तक की पीने के लिए भी ले जाते थे अब वही पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि छूने लायक नहीं है। चूंकि अब पूरा तालाब जलकुंभी से पटा हुआ है साथ ही तालाब के किनारे में होटलों गंदे पानी निकासी भी यहीं होती है। वैसे देश भर में इस समय स्वच्छता का अभियान चलाया जा रहा है परंतु यहां तो तस्वीर कुछ और ही है। इस ओर तो न किसी जनप्रतिनिधि ने ध्यान दिया है और न ही नगर पंचायत का प्रशासनिक अमला । यूं तो नगर में कई जगह स्वच्छता अभियान के तहत सफाई की जा रही परंतु यहां तालाबों की सफाई के लिए किसी प्रकार का कोई अभियान नहीं चल रहा है। यह तालाब एक धरोहर तालाब कहा जाता है तो क्यों न इसके लिए अभियान चलाया जाए। वैसे भी तालाब जमीन के लिए वाटर रिचार्ज का बेहतर जरिया है साथ ही एक बड़ी आबादी के निस्तारी के लिए भी उपयोग होता है। नगर में लगभग 10 से 12 तालाब है जिनमें से कई तालाबों में नालियों का गंदा पानी जा रहा है। नगरवासी भी पूजन सामाग्री विसर्जित करने के नाम पर तालाबों को प्रदूषित कर रहे हैं। दूसरी ओर...

Vice null Time०४ सितंबर २०१५ ००:४०:००