भेजपिरी गित

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विश्वविद्यालय का होगा अपना कुल गीत, कमेटी बनी

२१ नवंबर २०१६ ००:४२:०८ bhaskar

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय का भी अपना कुल गीत होगा। वैसे अधिकांश प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के अपने कुल गीत हैं। लेकिन 18 जुलाई 1946 को स्थापित और प्रदेश के पहले विश्वविद्यालय सागर विश्वविद्यालय का 70 साल बाद भी कोई वैध कुल गीत नहीं है। अब जाकर कुलपति प्रो. आरपी तिवारी की पहल पर इस दिशा में विवि प्रशासन ने काम शुरु किया है। कला गुरु विष्णु पाठक को चेयरमैन बनाकर एक कमेटी गठित कर दी गई है। इसकी एक बैठक भी हो चुकी है। इसमें तय हुआ है कि विश्वविद्यालय के कुल गीत के लिए देश भर के अच्छे रचनाकारों को विश्वविद्यालय का ब्रोशर भेजा जाए। जिसमें डॉ. गौर और विश्वविद्यालय की जानकारी हो। ताकि उन्हें कुल गीत बनाने में आसानी हो। इन से प्राप्त गीतों में से कमेटी की सिफारिश के बाद कोई एक गीत तय होगा। ईसी की मंजूरी मिलने के बाद उसे विवि का कुल गीत घोषित कर दिया जाएगा। कमेटी का समन्वयक हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. चंदा बेन को बनाया गया है। सदस्य के रूप में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश आचार्य, साहित्यकार निर्मलचंद निर्मल, डॉ. श्याम मनोहर...

Vice null Time२१ नवंबर २०१६ ००:४२:०८


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गीत और संगीत...

२९ मई २०१६ २३:४६:२१ bhaskar

गीत और संगीत... जावेदहुसैन ने सुनाए ये गीत : वीरजाराफिल्म में गीत गाने वाले हुसैन परिवार के जावेद हुसैन ने हीरे मोती मैं चाह गीत से शुरुआत की। सैंय्या तू जो छू ले प्यार से , जीयां जाए ना रतिया रे, हम तेरी बिन अब रह नहीं सकते गीत गाया। इस गाने को दर्शकों ने भी मिलकर उनके साथ गया। हुसैन ने अलवर के जयप्रकाश जुगनू के साथ मिलकर शराबी आंखें जो तेरी देखी की प्रस्तुति दी। येरहे सहयोगी: मुख्य प्रायोजक: फोर्टव्यू रेजीडेंसी सहयोगी प्रायोजक: आई.ई.टी. इंजीनियरिंग कॉलेज, सनराइज यूनिवर्सिटी, अन्य सहयोगी जयंती फूड प्रोडक्ट्स, एनआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज, माउंट लिटेरा जी स्कूल, अचीवर्स अकेडमी, डीपीएस वल्र्ड स्कूल, क्योरवैल डायग्नोस्टिक, नीलकंठ चाय, सीबा मसाला उद्योग, मंगल परिणय मैरिज गार्डन, एमआरएम. इफेक्ट प्वाईंट सिद्धार्थ एंटरप्राइजेज शामिल थे। येरहे अतिथि निर्णायक : कार्यक्रममें अतिथि के रूप में नगर परिषद सभापति अशोक खन्ना, जिला कलेक्टर मुक्तानंद अग्रवाल, एसडीएम राजेश गोयल मौजूद थे। निर्णायक मंडल में कृति, इरशाद, डॉ रचना आसोपा, डॉ. मंजरी मिश्रा, मयंक शर्मा...

Vice null Time२९ मई २०१६ २३:४६:२१


बदल गया गीत संगीत का रूप

२९ मई २०१६ २२:४५:३४ bhaskar

बॉलीवुडकी फिल्म वीरजारा में परिजनों के साथ गाना गाने वाले जावेद हुसैन का कहना है कि आज संगीत और गीत का रूप बदल गया है। फिर भी कई अच्छे गीत रहे हैं। इससे गीत और संगीत की गहराई का पता चलता है। जयपुर के रहने वाले जावेद ने यहां मंगल परिणय में भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि उनकी पिछली 5 पीढ़ियों संगीत से जुड़ी हैं। संगीत के कई बदले दौर उनके परिवार ने देखे हैं। इस बारे में घर-परिवार के सदस्यों के बीच जब भी बात होती है, तो कहा जाता है कि गीत और संगीत में बदलाव तो हर युग में आया पर अब ऐसा बदला है जहां मिक्स और रिमिक्स का दौर चल रहा है। इसमें भी बहुत कुछ नया रहा है। फिर भी माना जा रहा है संगीत गीत का पक्ष अधिक मजबूत नहीं रहा है। इसके बावजूद कई ऐसे गीत रहे हैं जिन्होंने आज भी गीत-संगीत के पक्ष को मजबूती से रखा। इसमें मेरे ढोलना जैसे गीत की उन्होंने तारीफ की। उनका यह भी कहना था कि आज लोक संगीत गीतों को अधिक पसंद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे आने वाली दो फिल्मों में गाने गा रहे हैं। उनके 5 एलबम भी जारी हुए हैं। अलवर. रविवार को अलवर आइडल में गीत गाते जावेद हुसैन।

Vice null Time२९ मई २०१६ २२:४५:३४


गीतों की शाम का आयोजन

१५ अप्रैल २०१६ ०२:४५:११ bhaskar

कोटा| जेसीआईकोटा डायनामिक के जेसीरेट विंग एवं जूनियर जेसी विंग द्वारा भूली बिसरी यादों को ताज़ा करने के लिए श्वेत श्याम गीतों से भरी शाम का आयोजन किया गया। अध्यक्ष सीए कनिका जैन राठी ने बताया कि जूनियर जेसी विंग की पूर्वी, आशना, नियति, प्रशंसा, माही एवं पलक ने पुराने गीतों पर नृत्य किया।

Vice null Time१५ अप्रैल २०१६ ०२:४५:११


15 मिनट में लिख दिया गीत

२८ फ़रवरी २०१६ २३:१२:२९ bhaskar

15 मिनट में लिख दिया गीत मेरी फिल्म शायद के लिए मानस मुखर्जी संगीत और निदा गीत लिख रहे थे। फिल्म में सीन था कि शराब पीने से 400 लोग मारे गए हैं, अस्पताल में लाशों के बीच से लोग आ जा रहे हैं। इस प्रसंग पर एक गीत निदा को लिखना था। शाम हो गई लेकिन न धुन बन पा रही थी और न ही निदा गीत लिख पा रहे थे। जब शाम हो गई तो निदा बोले-यार शाम हो गई, चलो पहले शराब पीते हैं, गीत बाद लिख लेंगे और चलते-चलते कहने लगे-दिन भर धूप का पर्वत काटा, शाम को पीने निकले हम। मैं चौंका और कहा -यही तो है गीत। और हम फिर से बैठे। उन्होंने गीत लिखा : दिन भर धूप का पर्वत काटा, शाम को पीने निकले हम, जिन गलियों में मौत बिछी थी, उनमें जीने निकले हम। यह गीत उस फिल्म में एकदम मौजूं था और निदा ने यह गीत 15 मिनट में पूरा लिख दिया। यही उनकी खूबी थी, सादा ज़बान में ज़िंदगी का फसलफा कहने की। इसे मन्ना डे ने गाया था। उन्होंने वतन नहीं छोड़ा जब ग्वालियर में निदा फाज़ली का मकान जला दिया गया तो निदा के परिवार वालों ने फैसला किया कि वे भारत छोड़ पाकिस्तान बस जाएंगे। लेकिन निदा का फैसला था मैं अपने मुल्क को छोड़कर कहीं नहीं...

Vice null Time२८ फ़रवरी २०१६ २३:१२:२९


गीत रंग में गूंजे सपोलिया के तराने

२४ जनवरी २०१६ २१:४५:२९ Jagran Hindi News - jammu-and-kashmir:jammu

जागरण संवाददाता, जम्मू : 'गीत रंग' में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सीता राम सपोलिया के गीतों

Vice सभी समाचार Time२४ जनवरी २०१६ २१:४५:२९


गायक गीतू के गीतों पर झूमे श्रोतागण

२८ दिसंबर २०१५ १२:३६:३३ Jagran Hindi News - punjab:amritsar

जागरण संवाददाता, अमृतसर : गुलाबी आंखें जो तेरी देखी. गीत गाकर चार सालों का नन्हा संगीत सोनी जब स्टेज

Vice सभी समाचार Time२८ दिसंबर २०१५ १२:३६:३३


कृष्ण को पाने के लिए गोपियों ने गाए थे गीत

२१ दिसंबर २०१५ १४:२४:०८ Jagran Hindi News - uttarakhand:haridwar

हरिद्वार: गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए गोपी गीत गाए थे। भागवत कथा में पांच गीतों का वर्

Vice सभी समाचार Time२१ दिसंबर २०१५ १४:२४:०८


साहित्य, विज्ञान एवं फिल्मी गीत

२१ दिसंबर २०१५ ०५:४४:५९ bhaskar

गायक एवं कवि बॉब डिलन का जन्म 24 मई 1941 को हुआ अर्थात दूसरे विश्व युद्ध के शिखर दिनों में इस प्रतिभाशाली व्यक्ति का जन्म हुआ । 1960 से 1970 तक उनके लिखे और गाए गीतों ने अपार लोकप्रियता प्राप्त की और उस दौर के सामाजिक आक्रोश को डायलन ने अपने गीतों में अभिव्यक्त किया। उनका गीत ‘द टाइम्स दे आर चैंजिंग’ और ‘ब्लोइंग इन द विंड’ तो उस दौर के युवा आक्रोश के लिए ‘एंथम’ की तरह थे। ये गीत उसी तरह युवा एंथम थे जैसे पंजाब में एक युवा आंदोलन में ‘साड्डा हक एत्थे रख’ था। अवाम के अधिकारों और युद्ध के खिलाफ उनकी रचनाओं का गहरा महत्व रहा है। हाल ही में लंदन में इस तरह के विचार सामने आए हैं कि मेडिकल विज्ञान से जुड़े हुए लोगों को डायलन के गीतों से अपने शोध कार्य में प्रेरणा मिलती है। 1970 में मेडिकल विज्ञान के शोध-पत्र में डायलन के गीत का संदर्भ दिया गया था। यह पहला इस तरह का अवसर था। उस दौर में अनेक शोध करने वालों ने डायलन के विभिन्न गीतों के सदर्भ दिए हैं। ‘प्रैक्टिकल नर्सिंग’ नामक विज्ञान पत्रिका में डायलन के कुछ गीतों का समावेश है। बायोमेडिकल प्रकाशनों में अनेक...

Vice null Time२१ दिसंबर २०१५ ०५:४४:५९


ग्वालियर गीत समारोह आज

२६ नवंबर २०१५ २२:३६:१५ bhaskar

ग्वालियर गीत समारोह आज सिटी रिपोर्टर

Vice null Time२६ नवंबर २०१५ २२:३६:१५